RAASTA APNA is a Hindi words which is official and common language of India.It means "create your way".Especially it based on creation of something enovative. Neither follow others nor copy.
Tuesday, 2 August 2016
चंहुमुखी विकास शब्द का अर्थ
चंहुमुखी विकास:-
किसी व्यक्ति के संपूर्णता में अर्थात भौतिक,बौद्धिक,नैतिक तथा आध्यात्मिक विकास के अर्थ में चंहुमुखी विकास शब्द का प्रयोग किया जाता है।
Monday, 1 August 2016
व्यंजन छः.गढ़ी
1.ठेठरी-
बेसन की बनी नमकीन व्यंजन है।खासकर हरेली के अवसर पर बनाया जाता है।
2.खुरमी-
गेहूं की पिसान में गुड़/सक्कर मिला कर बनाया जाता है।
3.देहरौरी-
चावल की पिसान के साथ घी और गुड़/शक्कर मिलाकर बनाया जाता है।इसे खासकर होली के अवसर पर बनाया जाता है।ये दो तरह का बनाया जाता है-
(1)सूखा,
(2)चासनी-इसे देसी/छत्त्तीसगढ़ी रसगुल्ला कहते है।
Thursday, 21 July 2016
BANS GEET
Bans geet ki utpati k sambandh me ek vakya prachlit hai.
Ek gwala(mostly yduvansi)tha Jo ki janvro ko charane jungle side lekar gya tha.
Wo ye dekhkar achmbhit hua ki-ek BANS ki jhadi me se surili dhvani nikal rhi h.
Wo bans ki jhadi k ird-gird ghum kar tadne lga ki aakhir kya ho rha h.
Usne paya ki bans ki ek ped me ched(hole) hai or tej hava k chalne se usme se awaj aa rha h.Usne wo bans kat(cut) liya or ghr lakar usme aur ched(hole) kiye.or bajane lga.
Apni is nutan khoj se wah kafi khus tha.Usne sabhi ko dikhaya or apni jati k sabhi jano ko sikhaya.
Tb se BANS GEET ki utpati hui.BANS GEET ka aasay UN geeto se hai jinhe Bans namak geet k sath gaya jata hai.Yah geet 'KARUN' Gatha par aadharit hai.Mordhwaj karn k gathao par aadharit hai.
Mukhya gayak-Nakul Yadav,Kaijuram Yadav hai.
GEET mainly Yduvansi k upjati k logo me kafi prachlit hai.Jo nimnalikhit hain-
1.Raut
2.Kosariya
2.Jheriya
4.Thethwar
BANS GEET k bans vadak ko bajane wala 'BANS KAR' kahlata hai.Usme banskar k sangat k liye 'RAGI' bhi hota hai.Jo bich-bich me 'Tehi' deta hai.
Ek gwala(mostly yduvansi)tha Jo ki janvro ko charane jungle side lekar gya tha.
Wo ye dekhkar achmbhit hua ki-ek BANS ki jhadi me se surili dhvani nikal rhi h.
Wo bans ki jhadi k ird-gird ghum kar tadne lga ki aakhir kya ho rha h.
Usne paya ki bans ki ek ped me ched(hole) hai or tej hava k chalne se usme se awaj aa rha h.Usne wo bans kat(cut) liya or ghr lakar usme aur ched(hole) kiye.or bajane lga.
Apni is nutan khoj se wah kafi khus tha.Usne sabhi ko dikhaya or apni jati k sabhi jano ko sikhaya.
Tb se BANS GEET ki utpati hui.BANS GEET ka aasay UN geeto se hai jinhe Bans namak geet k sath gaya jata hai.Yah geet 'KARUN' Gatha par aadharit hai.Mordhwaj karn k gathao par aadharit hai.
Mukhya gayak-Nakul Yadav,Kaijuram Yadav hai.
GEET mainly Yduvansi k upjati k logo me kafi prachlit hai.Jo nimnalikhit hain-
1.Raut
2.Kosariya
2.Jheriya
4.Thethwar
BANS GEET k bans vadak ko bajane wala 'BANS KAR' kahlata hai.Usme banskar k sangat k liye 'RAGI' bhi hota hai.Jo bich-bich me 'Tehi' deta hai.
Wednesday, 7 October 2015
राह का रोड़ा
आज कुछ ऐसे उदाहरण से आपको रुबरु कराऊँगा जिसे मैंने मेट्रोपॉलिट्न सिटी दिल्ली में रहकर अनुभव किया|
ध्यान रखना मैं एक छोटी सी बात बता रहा हुं लेकिन इससे आपके जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का हल यूं ही निकल आयेगी|
मैंने देखा कि मॉनसून सीजन में दिल्ली की औसत तापमान 18°C के ईर्द-गिर्द ही रहती है जबकि बिल्कुल इसी स्तर की तापमान विण्टर यानी ठण्डे में भी रहती है लेकिन क्यों हम किसी एक सीजन में थर्मल वियर तो दूसरे में रेन वियर पहनते हैं जबकि दोनों ही सीजन में तापमान लगभग बराबर हैं|
वैग्यानिक कारण जो भी हो उसे उपेक्छित कर मैं बचपन से हमारे अंदर भरी गई सोच को उजागर करना चाह रहा हुं क्योंकि मम्मी ने कहा है कि बेटे ऐसे मत निकला कर ठण्ड लग जाएगा|ऐसे कपड़े मत पहन जब तु भीग जाऐगा तो सूखेगा नहीं|
हमारे राह का असली रोड़ा तो यही है हमारे अंदर भरी गई बातें|दोस्तों ऐसे ही कई बुराईयां हमारे अंदर भरी हैं जिन्हें हमारे पूर्वज बगैर कोई तर्क किये अपनाते गये और हम को स्थानांतरित करते गये और यही बातें हमारी कल्चर भी बनीं|
सो आपसे रिक्वेस्ट है कि जरा सा तार्किक रहें और लाईफस्टाईल बदलें|
धन्यवाद
प्रस्तुति:विवेक खेस्स
ध्यान रखना मैं एक छोटी सी बात बता रहा हुं लेकिन इससे आपके जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का हल यूं ही निकल आयेगी|
मैंने देखा कि मॉनसून सीजन में दिल्ली की औसत तापमान 18°C के ईर्द-गिर्द ही रहती है जबकि बिल्कुल इसी स्तर की तापमान विण्टर यानी ठण्डे में भी रहती है लेकिन क्यों हम किसी एक सीजन में थर्मल वियर तो दूसरे में रेन वियर पहनते हैं जबकि दोनों ही सीजन में तापमान लगभग बराबर हैं|
वैग्यानिक कारण जो भी हो उसे उपेक्छित कर मैं बचपन से हमारे अंदर भरी गई सोच को उजागर करना चाह रहा हुं क्योंकि मम्मी ने कहा है कि बेटे ऐसे मत निकला कर ठण्ड लग जाएगा|ऐसे कपड़े मत पहन जब तु भीग जाऐगा तो सूखेगा नहीं|
हमारे राह का असली रोड़ा तो यही है हमारे अंदर भरी गई बातें|दोस्तों ऐसे ही कई बुराईयां हमारे अंदर भरी हैं जिन्हें हमारे पूर्वज बगैर कोई तर्क किये अपनाते गये और हम को स्थानांतरित करते गये और यही बातें हमारी कल्चर भी बनीं|
सो आपसे रिक्वेस्ट है कि जरा सा तार्किक रहें और लाईफस्टाईल बदलें|
धन्यवाद
प्रस्तुति:विवेक खेस्स
Wednesday, 30 September 2015
Tuesday, 17 February 2015
विवेविवेकवाणी 006
"है थी कितनी आसान जिंदगी तेरी राहें,मुस्किलें खुद ही तौल कर खरीदा|
बहुत होने के बाद भी यह सोचता,,काश कुछ और मिला होता||
बहुत होने के बाद भी यह सोचता,,काश कुछ और मिला होता||
Sunday, 15 February 2015
RAAH ka SAATHI
सतपथ नामक ब्राह्मण पड़ोस के गांव दान-दक्छिणा लेने जाने के लिए तैयार हो रहे थे और ऊधर उसकी मॉं चिंतित थी कि ऐसे सुनसान राह पर बेटे को अकेले कैसे भेजूं??इसी ऊधेड़बुन में मॉं-बेटा सतपथ!!राहें सुनसान हैं फिर तु अकेले कैसे जाएगा?
सतपथ-मॉं अब मैं बच्चा तो रहा नहीं,तो फिर आप क्यों चिंतित हो?
मॉं-बेटा!फिर भी मेरे खातिर तुम किसी को साथ लेकर जाओ|
सतपथ-अपनी ऊंगली के नाखुन काटता हुआ कुछ देर बाद|अपनी कपूर की पोटली ऊठाते हुए कहता है-अम्मा!मुझे डर नहीं,अब मैं चला,कहकर निकलने लगा कि तभी अम्मा को एक तरकीब सुझा और उसने बेटे की कपूर की पोटली में एक केंकड़ा डाल दिया|
गॉंव घूमते-घूमते सतपथ थक हार कर घर की ओर बढ़ा|रास्ते में थकने पर वह पेड़ के नीचे छांव में सुस्ताने लगा चूंकि दक्छिणा काफी वजनी था सो सतपथ थक चुका था|और वह नींद की आगोश में चला गया|पेड़ पर से सांप उतरा और सांप ने पहले सतपथ के फेरे लगा ही रहे थे की कपूर की सुगंध सांप के नाक में पड़ी और वह कपूर की पोटली को खोला और देखते ही देखते केंकड़े ने काम तमाम कर दी|इतने में सतपथ की नींद खुली और वह आंख खुजा रहा था कि उसे कुछ गड़बड़ सा महसुस हुआ,गौर से देखा तो भौंचक रह गया|
उसे अम्मा के सामने किये जिद की ख्याल आई और वह अम्मा की इसके बाद हर बात सुनने लगा|
Friends कैसे लगी story. ़कहानी की सार तो आपने ताड़ ही ली होगी?आवश्यकता है तो करने की|thanks to contribut me.
सतपथ-मॉं अब मैं बच्चा तो रहा नहीं,तो फिर आप क्यों चिंतित हो?
मॉं-बेटा!फिर भी मेरे खातिर तुम किसी को साथ लेकर जाओ|
सतपथ-अपनी ऊंगली के नाखुन काटता हुआ कुछ देर बाद|अपनी कपूर की पोटली ऊठाते हुए कहता है-अम्मा!मुझे डर नहीं,अब मैं चला,कहकर निकलने लगा कि तभी अम्मा को एक तरकीब सुझा और उसने बेटे की कपूर की पोटली में एक केंकड़ा डाल दिया|
गॉंव घूमते-घूमते सतपथ थक हार कर घर की ओर बढ़ा|रास्ते में थकने पर वह पेड़ के नीचे छांव में सुस्ताने लगा चूंकि दक्छिणा काफी वजनी था सो सतपथ थक चुका था|और वह नींद की आगोश में चला गया|पेड़ पर से सांप उतरा और सांप ने पहले सतपथ के फेरे लगा ही रहे थे की कपूर की सुगंध सांप के नाक में पड़ी और वह कपूर की पोटली को खोला और देखते ही देखते केंकड़े ने काम तमाम कर दी|इतने में सतपथ की नींद खुली और वह आंख खुजा रहा था कि उसे कुछ गड़बड़ सा महसुस हुआ,गौर से देखा तो भौंचक रह गया|
उसे अम्मा के सामने किये जिद की ख्याल आई और वह अम्मा की इसके बाद हर बात सुनने लगा|
Friends कैसे लगी story. ़कहानी की सार तो आपने ताड़ ही ली होगी?आवश्यकता है तो करने की|thanks to contribut me.
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