"Zindagi sirfnazdikiyo se nahi chalti kamabakht duriya bhi jruri hoti hai .......""
RAASTA APNA is a Hindi words which is official and common language of India.It means "create your way".Especially it based on creation of something enovative. Neither follow others nor copy.
Wednesday, 30 September 2015
Tuesday, 17 February 2015
विवेविवेकवाणी 006
"है थी कितनी आसान जिंदगी तेरी राहें,मुस्किलें खुद ही तौल कर खरीदा|
बहुत होने के बाद भी यह सोचता,,काश कुछ और मिला होता||
बहुत होने के बाद भी यह सोचता,,काश कुछ और मिला होता||
Sunday, 15 February 2015
RAAH ka SAATHI
सतपथ नामक ब्राह्मण पड़ोस के गांव दान-दक्छिणा लेने जाने के लिए तैयार हो रहे थे और ऊधर उसकी मॉं चिंतित थी कि ऐसे सुनसान राह पर बेटे को अकेले कैसे भेजूं??इसी ऊधेड़बुन में मॉं-बेटा सतपथ!!राहें सुनसान हैं फिर तु अकेले कैसे जाएगा?
सतपथ-मॉं अब मैं बच्चा तो रहा नहीं,तो फिर आप क्यों चिंतित हो?
मॉं-बेटा!फिर भी मेरे खातिर तुम किसी को साथ लेकर जाओ|
सतपथ-अपनी ऊंगली के नाखुन काटता हुआ कुछ देर बाद|अपनी कपूर की पोटली ऊठाते हुए कहता है-अम्मा!मुझे डर नहीं,अब मैं चला,कहकर निकलने लगा कि तभी अम्मा को एक तरकीब सुझा और उसने बेटे की कपूर की पोटली में एक केंकड़ा डाल दिया|
गॉंव घूमते-घूमते सतपथ थक हार कर घर की ओर बढ़ा|रास्ते में थकने पर वह पेड़ के नीचे छांव में सुस्ताने लगा चूंकि दक्छिणा काफी वजनी था सो सतपथ थक चुका था|और वह नींद की आगोश में चला गया|पेड़ पर से सांप उतरा और सांप ने पहले सतपथ के फेरे लगा ही रहे थे की कपूर की सुगंध सांप के नाक में पड़ी और वह कपूर की पोटली को खोला और देखते ही देखते केंकड़े ने काम तमाम कर दी|इतने में सतपथ की नींद खुली और वह आंख खुजा रहा था कि उसे कुछ गड़बड़ सा महसुस हुआ,गौर से देखा तो भौंचक रह गया|
उसे अम्मा के सामने किये जिद की ख्याल आई और वह अम्मा की इसके बाद हर बात सुनने लगा|
Friends कैसे लगी story. ़कहानी की सार तो आपने ताड़ ही ली होगी?आवश्यकता है तो करने की|thanks to contribut me.
सतपथ-मॉं अब मैं बच्चा तो रहा नहीं,तो फिर आप क्यों चिंतित हो?
मॉं-बेटा!फिर भी मेरे खातिर तुम किसी को साथ लेकर जाओ|
सतपथ-अपनी ऊंगली के नाखुन काटता हुआ कुछ देर बाद|अपनी कपूर की पोटली ऊठाते हुए कहता है-अम्मा!मुझे डर नहीं,अब मैं चला,कहकर निकलने लगा कि तभी अम्मा को एक तरकीब सुझा और उसने बेटे की कपूर की पोटली में एक केंकड़ा डाल दिया|
गॉंव घूमते-घूमते सतपथ थक हार कर घर की ओर बढ़ा|रास्ते में थकने पर वह पेड़ के नीचे छांव में सुस्ताने लगा चूंकि दक्छिणा काफी वजनी था सो सतपथ थक चुका था|और वह नींद की आगोश में चला गया|पेड़ पर से सांप उतरा और सांप ने पहले सतपथ के फेरे लगा ही रहे थे की कपूर की सुगंध सांप के नाक में पड़ी और वह कपूर की पोटली को खोला और देखते ही देखते केंकड़े ने काम तमाम कर दी|इतने में सतपथ की नींद खुली और वह आंख खुजा रहा था कि उसे कुछ गड़बड़ सा महसुस हुआ,गौर से देखा तो भौंचक रह गया|
उसे अम्मा के सामने किये जिद की ख्याल आई और वह अम्मा की इसके बाद हर बात सुनने लगा|
Friends कैसे लगी story. ़कहानी की सार तो आपने ताड़ ही ली होगी?आवश्यकता है तो करने की|thanks to contribut me.
Wednesday, 11 February 2015
Tuesday, 10 February 2015
जीवन:सुख-दू:ख का संगम है
काफी पहले की बात है किसी गाँव में तबाही मचने के बाद सिर्फ दो लोग बचे थे|एक औरत एवं उसका नन्हां बच्चा|कुछ दिनों तक जैसे-तैसे सब ठीक चल रहा था कि बच्चा भी आहत होने के कारण भगवान को प्यारे हो गये|
मम्मी बच्चे के लिए बिलखती रही पर क्या यहां तो कोई सांत्वाना देने वाला भी न बचा था आखिर हार कर उसने पड़ोस के किसी गांव में भगवान के शिष्य के होने की खबर लगीो|वह उनके पास सबेरे पहुंच गई|उसने अपनी दूख सुनाया|सुनने के बाद शिष्य ने एक रहस्यात्मक बात महिला से कही-बेटी तु इस संसार में कोई भी ऐसा परिवार ढुंढ़ कर ला जिसके यहां अब तक किसी की मृत्यु न हुई हो|यदि तुम्हें कोई ऐसा परिवार मिले तो वापस अवश्य आना जिससे कि मैं तेरे पुत्र को तेरे इच्छानुसार जीवित कर सकुं|वह ऐसे परिवार ढूंढ़ने चल पड़ी|एक परिवार से दूसरे परिवार पूछते रही और सभी के घर उसे यही जवाब मिलता कि-मेरे बेटे,पति,बच्चे का स्वर्गवास हो गया है|
दरअसल कहानी का सार ये है कि एक न एक दिन सभी को जाना
मम्मी बच्चे के लिए बिलखती रही पर क्या यहां तो कोई सांत्वाना देने वाला भी न बचा था आखिर हार कर उसने पड़ोस के किसी गांव में भगवान के शिष्य के होने की खबर लगीो|वह उनके पास सबेरे पहुंच गई|उसने अपनी दूख सुनाया|सुनने के बाद शिष्य ने एक रहस्यात्मक बात महिला से कही-बेटी तु इस संसार में कोई भी ऐसा परिवार ढुंढ़ कर ला जिसके यहां अब तक किसी की मृत्यु न हुई हो|यदि तुम्हें कोई ऐसा परिवार मिले तो वापस अवश्य आना जिससे कि मैं तेरे पुत्र को तेरे इच्छानुसार जीवित कर सकुं|वह ऐसे परिवार ढूंढ़ने चल पड़ी|एक परिवार से दूसरे परिवार पूछते रही और सभी के घर उसे यही जवाब मिलता कि-मेरे बेटे,पति,बच्चे का स्वर्गवास हो गया है|
दरअसल कहानी का सार ये है कि एक न एक दिन सभी को जाना
Saturday, 7 February 2015
मित्रता समानों में भली
प्रिय पाठक गण/बन्धुओ मेरे blog:http://www.vivekxess13.blogspot. com पर अपना बहुमूल्य समय invest करने के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहुंगा|दरअसल मुझे blog create करने से पहले कुछ भी मालूम नहीं था जिसका खामियाजा आप सभी पाठकोॉ को उठाना पढ़ रहा हो तो I'm really sorry.कुछ दिनों बाद मैंने अपना personal domain name बनाने का फैसला किया है जो आपको blog address remember करे में easy होगी और तो और हमें browser पर too much long type नहीं करनी होगी|
कहानी पर आते हैं काफी पहले की बात है सियार और बगुले में गहरी मित्रता थी|बगुले से मित्रता करके सियार अपनी चालाकी स्वभाव भूल चुका था और दोनों मस्त enjoy, करते कभी सरोवर(तालाब) किनारे तो कभी नदिया तीरे|पर बगुला तो जल देख मचल उठता है और पानी में उतरते ही नन्हीं मछलियों का शिकार कर अपना पेट भर लेता है और सियार तो मछली पकड़ नहीं सकता दरअसल सियार पानी में जा ही नहीं सकता और खाना न खाना तो दूर की बात ठहरी|ऐसे ही कई दिन सियार को भु:खे ही सोने पड़तेपड़ते|बगुला चुपके से अपना पेट भी भर लेता और आकर पानी भी अपनी सुराही में
पीता|सियार बेचारा शाम को भी पानी नहीं पी पाता फिर भी है कि रिश्ते निभाता जा रहा था|एक दिन सियार की मां मेहमान आई और अपने बच्चे को बगुले के साथ पाकर ताज्जुब करने लगी|शिकार के साथ रहते हुए भी बेटा भु:खा है और उसने अपनी भाषा में बच्चे को कहा-अरे!मिंया छोटे शिकार के साथ रहकर भी हम भूःखे क्यूं हैं?क्योंकि हमने अपनी पहचान भूली है|
सियार(बच्चा)-मॉम!मैं कुछ समझा नहीं?
सियार(मॉम)-अरे बच्चा!तु एक मांसाहारी सियार है और तेरा पेट दो-चार मेंढक-मछलियों से तो भरने से रहा|फिर तु इस आभागिन के साथ क्यूं रहते हो?अच्छा होगा मैं इसे अकेले खा लूं|
सियार की अक्ल फिरी और वह भी मॉम के साथ राजी हो गया|
Plan. के मुताबिक सियार ने बहुत सारे बगुलों को पार्टी में आमंत्रित किया और अपने घर का गेट बंद कर खुब मजा मनाया|कई दिनों से भुःखा सियार भी मजे से खाया|सच ही तो कहते हैं मित्रता समानों में ही भली है|
कहानी पर आते हैं काफी पहले की बात है सियार और बगुले में गहरी मित्रता थी|बगुले से मित्रता करके सियार अपनी चालाकी स्वभाव भूल चुका था और दोनों मस्त enjoy, करते कभी सरोवर(तालाब) किनारे तो कभी नदिया तीरे|पर बगुला तो जल देख मचल उठता है और पानी में उतरते ही नन्हीं मछलियों का शिकार कर अपना पेट भर लेता है और सियार तो मछली पकड़ नहीं सकता दरअसल सियार पानी में जा ही नहीं सकता और खाना न खाना तो दूर की बात ठहरी|ऐसे ही कई दिन सियार को भु:खे ही सोने पड़तेपड़ते|बगुला चुपके से अपना पेट भी भर लेता और आकर पानी भी अपनी सुराही में
पीता|सियार बेचारा शाम को भी पानी नहीं पी पाता फिर भी है कि रिश्ते निभाता जा रहा था|एक दिन सियार की मां मेहमान आई और अपने बच्चे को बगुले के साथ पाकर ताज्जुब करने लगी|शिकार के साथ रहते हुए भी बेटा भु:खा है और उसने अपनी भाषा में बच्चे को कहा-अरे!मिंया छोटे शिकार के साथ रहकर भी हम भूःखे क्यूं हैं?क्योंकि हमने अपनी पहचान भूली है|
सियार(बच्चा)-मॉम!मैं कुछ समझा नहीं?
सियार(मॉम)-अरे बच्चा!तु एक मांसाहारी सियार है और तेरा पेट दो-चार मेंढक-मछलियों से तो भरने से रहा|फिर तु इस आभागिन के साथ क्यूं रहते हो?अच्छा होगा मैं इसे अकेले खा लूं|
सियार की अक्ल फिरी और वह भी मॉम के साथ राजी हो गया|
Plan. के मुताबिक सियार ने बहुत सारे बगुलों को पार्टी में आमंत्रित किया और अपने घर का गेट बंद कर खुब मजा मनाया|कई दिनों से भुःखा सियार भी मजे से खाया|सच ही तो कहते हैं मित्रता समानों में ही भली है|
Thursday, 5 February 2015
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